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के. विश्वनाथ

          अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानेवाले "दादा साहेब फाल्के पुरस्कार" से सन्मानित तेलुगु फिल्म उद्योग के फिल्म निदेशक, पटकथा लेखक एवं लोकप्रिय अभिनेता श्री। के. विश्वनाथ दिग्गज फिल्मकार का अपनी लम्बी बीमारी से लड़ते-लड़ते वे जिंदगी से हार गए। 2 फरवरी 2023 को उन्होंने अपनी आँखे सदा-सदा के लिए मूंद ली और अपने प्रशंसकों के दिलों में इतिहास बन समा गए।

के. विश्वनाथ के नाम बॉलीवुड की कई फ़िल्में दर्ज है। इसमें1979 की फिल्म "सरगम" 1982 की फिल्म "कामचोर" , 1983 की फिल्म "शुभ कामना" , 1984 की फिल्म "जाग उठा इंसान" , 1985 की फिल्म "सुर संगम" तथा संजोग "और 1989 की फिल्म" ईश्वर " दर्ज है।


प्रारम्भिक जीवन:

के. विश्वनाथ का जन्म आंध्रप्रदेश स्थित रेपेले गाँव में 19 फरवरी 1930 को हुआ था। उनके माता पिता कासीनाधुनि सुब्रमण्यम तथा माता कासीनाधुनि सरस्वती थे। के. विश्वनाथ ने आंध्र प्रदेश के गुंटूर स्थित हिन्दू कॉलेज से इण्टर मीडिएट तक अध्ययन किया था। वहीं उन्होंने आंध्र क्रिश्चियन कॉलेज से बी. एस.-सी की उपाधि प्राप्त की थी।

फिल्मों की ओर:

दिग्गज फिल्मकार के. विश्वनाथ ने 1951 में एन. टी. रामाराव द्वारा अभिनीत तमिल-तेलुगु फिल्म "पथला भैरवी" के निर्देशक के. वी. रेड्डी के सहायक के रूप में अपना फिल्मी कर्रिएर आरम्भ किया था।

विश्वनाथ हमेशा से ही सामाजिक एवं मानवीय मुद्दों के पक्षधर रहें है। उनके इस स्वभाव की झलक हमें उनकी फिल्मों में भी दिखाई पड़ती है, विशेषकर तेलुगु सिनेमा में। उनकी फिल्मों में अधिकतर अस्पृश्यता तथा जाति व्यवस्था की बुराईयों जैसे विषयों पर प्रकाश डाला है।

उनकी इस समस्या को लेकर बनी तेलुगु फिल्मों में "शुभ संकल्पम" , श्रुतिलायालु "," सप्तपदी "," सुत्रधारुलु "," सिरिवेनेला "और" आपादबँधवुडू " शामिल है।

अभिनय के क्षेत्र में :    

                            

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शुभ संकल्पम 
          अभिनय के क्षेत्र में इस दिग्गज फिल्मकार ने 1995 में एस. पी. बालसुब्रमण्यम द्वारा निर्मित तेलुगु फिल्म "शुभ संकल्पम" में अभिनेता कमल हसन और अभिनेत्री आमला के साथ "रायुडू" का किरदार निभाकर अपना अभिनय का ग्राफ खोला था।

           इसी के साथ उन्होंने अनेक तेलुगु और तमिल  फिल्मों में चरित्र अभिनेता के किरदार निभाना आरम्भ किया जिसमे --- '' वज्रम '' (1995), '' कालीसुन्दम रा '' (2000), '' नरसिम्हा नायडू '' (2001), '' नुव्वु लेका नेनु लेनु '' (2002),   '' संतोषम '' (2002), '' सीमा सिंघम '' (2002), '' टैगोर '' (2002), 2003),  ''लक्ष्मी नरसिम्हा '' (2004), '' स्वराभिषेकम '' (2004), '' आदवरी मतलकु अर्थले वेरुले '' (2007), '' अथाडु '' (2005), और '' पांडुरंगडु '' (2008), और '' देवस्थानम '' (2012)। उन्होंने '' कुरुथिपुनल '' (1995), '' मुगावरी '' (1999), '' कक्कई सिरागिनिले '' (2000), ''बगावती '' (2002),  ''पुधिया गीताई '' (2003), '' यारदी नी मोहिनी '' (2008), '' राजापट्टई '' (2011), '' सिंगम II '' (2011) जैसी तमिल कृतियों में चरित्रों का अभिनय किया। 2013), लिंगा (2014) 
          के. विश्वनाथ ने अपनी कला एवं विचारों का परिचय बॉलीवुड से भी कराया है। उन्होंने बॉलीवुड के कई जानेमाने निर्माताओं की लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया है, जिसमे ---- 
1]  फिल्म '' सरगम '' [ 1979 ] निर्माता - एन. एन. सिप्पी। 
2]  फिल्म '' कामचोर '' [1982] निर्माता - राकेश रोशन। 
3] फिल्म '' शुभ कामना '' [1983] निर्माता - वी. वी. शास्त्री। 
4] फिल्म '' जाग उठा इंसान '' [1984] निर्माता - राकेश रोशन।
5] फिल्म '' सुरसंगम '' [1985] निर्माता - वड्डे रमेश। 
6] फिल्म '' संजोग '' [1985] निर्माता- पी. मालिख़ारजुना। 
7] फिल्म '' ईश्वर '' [1989] निर्माता  "  ''   ''    ''    ''   '' । 
8] फिल्म '' संगीत '' [1992] निर्माता - गुलशन कुमार। 
9] फिल्म '' धनवान'' [1993] निर्माता - सुधाकर बोकडे  
मान एवं सन्मान : -   
    के. विश्वनाथ दिग्गज फिल्मकार को उनके कार्यों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें मुख्यधारा के व्यावसायिक सिनेमा के साथ साथ समानांतर सिनेमा के लिए सं. 1981 में '' बेसनकॉन फिल्म फेस्टिवल ऑफ फ्रांस '' में ' प्राइज ऑफ द पब्लिक ' से सन्मानित किया गया था। उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा सं. 1992 में '' रघुपति वेंकैया पुरस्कार और नागरिक सम्मान '' पद्मश्री '' से सन्मानित किया गया है। इसके आलावा भारत सरकार ने उन्हें सं. 2017 में सर्वोच्य पुरस्कार '' दादा साहेब  फाल्के '' से सन्मानित किया गया।  

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