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हिंदी सिनेमा में लेडी खलनायिका का पोस्टर       

                भारतीय हिन्दी सिनेमा में 1930 से 1950 के दशक में महिला अभिनेत्री केवल नायिका की भूमिका में नज़र आती थी। हिन्दी सिनेमा में खलनायक की भूमिका में ज्यादातर पुरुष अभिनेता ही नकारात्मक खलनायक की भूमिका निभाते थे।

             परन्तु, कुछ अपवाद भी है। इन हिन्दी सिनेमा के परदे पर महिला अभिनेत्रियों ने खलनायिका की बागडोर अपने हाथों में थाम ली। उन अभिनेत्री खलनायिका और उनकी फ़िल्मों की जानकारी देने का एक छोटा-सा प्रयास है।

                                                                      
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नकारात्मक भूमिका निभानेवाली अभिनेत्रियां प्रतिमा देवी और मुमताज शांति

प्रतिमा देवी : -

                      प्रतिमा देवी उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में इच्छाधारी नागिन की नकारात्मक भूमिका निभाई थी। उनकी दो फ़िल्में " वामिक अजरा " [1936] और निर्माता हितेन चक्रवर्ती एवं निर्देशक नितिन बोस की फिल्म " मिलन " [1946] जिसमे मुख्य भूमिका में अभिनेता दिलीप कुमार थे। 

मुमताज शांति : - 

                    मुमताज शांति का जन्म 28 मई 1926 को आजादी से पूर्व पंजाब के डिंबा में हुआ था। उनकी नकारात्मक किरदार की भूमिका वाली फिल्म " अनारकली " [1953] और फिल्म " शहीद " [1948] है।

                   1940 और 1950 के आरम्भ में युवा दिलीप कुमार के साथ फ़िल्म "बसंत" [1942] , फ़िल्म "क़िस्मत" [1943] और फ़िल्म "घर की इज़्ज़त" [1948] जैसी हिट फ़िल्में थी। 1950 तक महिला खलनायिकाओं का ट्रेंड नया-नया था, जिसे दर्शकों ने स्वीकारा था।


                                            

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पुराने दौर की लेडी खलनायिका शशिकला, मनोरमा और ललिता पवार  

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पुराने दौर की लेडी खलनायिका बिंदु, नादिरा और अरुणा ईरानी 

                                          

                  भारतीय हिन्दी सिनेमा में विगत कुछ वर्षों से महिला खलनायिकाओं के किरदार में महत्त्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। जबकि सिनेमा के शुरुवाती दिनों से ही फ़िल्मों में विरोधी महिला किरदारों को देखा जा रह है।एक महिला खलनायिका किरदार के केंद्र में आने से और बॉलीवुड में प्रतिष्ठित होने का सबसे पहला और उल्लेखनीय उदाहरण देखा जाय तो फ़िल्म "कटी पतंग" [1970] में बिंदु का है।                                          

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फिल्म " कटी पतंग " 1970 का पोस्टर और अभिनेत्री बिंदु
            निर्माता - निर्देशक शक्ति सामंत की फिल्म " कटी पतंग " में बिंदु नानूभाई देसाई [ बिंदु ] का किरदार उन पहले उदाहरणों  में से एक था, जहां एक महिला किरदार ने इतनी गहराई और प्रभाव के साथ चालाक और षडयंत्रकारी प्रतिपक्षी की भूमिका निभाई थी। 

          अभिनेत्री बिंदु ने फिल्म " कटी पतंग " में नैना नाम की एक महिला का किरदार निभाया था, जो नायक के साथ छेड़छाड़ करती है और उसके जीवन में बाधाएँ पैदा करती है।  

          बिंदु ने निभाय हुए नैना का किरदार अपने समय के लिए अभूतपूर्व था और इस किरदार ने बॉलीवुड के हिंदी सिनेमा में भविष्य की खलनायिकाओं के लिए एक मानक स्थापित किया हो।

         उन अभिनेत्रियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की मिसाल से अन्य अभिनेत्रियों के लिए हिन्दी सिनेमा स्क्रीन पर विविध और जटिल नकारात्मक भूमिकाएँ निभाने और बॉलीवुड में महिला खलनायिकाओं को प्रदर्शित करने का मार्ग प्रशस्त किया है।

       बस यहीं से, अनेक नई अभिनेत्रियों ने हिन्दी सिनेमा की पुरानी अभिनेत्रियों के रिकॉर्ड को पलटते हुए यादगार नकारात्मक किरदारों को निभाते हुए सिनेमा उद्योग में अपनी छाप छोड़ी है।

             फ़िल्म "अनुपमा" [1966] में अभिनेत्री शशिकला से लेकर फ़िल्म "एतराज" [2004] में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उससे आगे तक, महिला खलनायिका बॉलीवुड सिनेमा की कहानी का एक अभिन्न हिस्सा हो गयी है।

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नकारात्मक भूमिका निभानवाली अभिनेत्रियाँ ऊपर से अमृता सिंह ,नीचे अन्नू अग्रवाल, ऐश्वर्या राय, काजोल विद्या बालन प्रियंका चोपड़ा बीच में बिपाशा बासु  
  
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तब्बू और अनु अग्रवाल
                                                                             

                    निश्चित रूप से ! यहाँ पर 1930 के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड के हिंदी सिनेमा में वास्तव में एक नायिका होते हुए भी खलनायिका का क़िरदार निभाकर उल्लेखनीय खलनायिका के क्लब में अपना नाम दर्ज किया है।

नकारात्मक भूमिका निभानेवाली पुरानी अभिनेत्रियां : -

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अभिनेत्री शशिकला

शशिकला : -

                  शशिकला सैगल का वास्तविक नाम शशिकला जावलकर है। विवाह के पश्चात वे सैगल बनी। वैसे वे हिन्दी सिनेमा जगत में शशिकला के नाम से ही जानी जाति थी।

                शशिकला का जन्म 4 अगस्त 1932 को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक मराठी परिवार में हुआ था। वे हिन्दी सिनेमा की जानीमानी सहायक अभिनेत्री थी। उन्होंने 1940 के दशक की शुरूवात में सैकड़ों बॉलीवुड फ़िल्मों में सहायक भूमिकाएँ निभाई है। उनका निधन 4 अप्रैल 2021 को हुआ।

              उनकी फ़िल्में कुछ इस प्रकार है—फ़िल्म "करोड़पति" [1936] , फ़िल्म "झीनत" [1945] , फ़िल्म "चाँद" [1944] , फ़िल्म "आखरी पैगाम" [1949] ,फ़िल्म "आरजू" [1950] ऐसी ही अनेक फ़िल्में उनके नाम दर्ज है। 

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अभिनेत्री मनोरमा

 मनोरमा : - 

 1936 में बेबी आइरिस के नाम से एक बाल कलाकार के रूप में करिअर शुरू करनेवाली आइरिस ने 1941 में वयस्क अभिनेत्री मनोरमा के नाम से अपना करियर आरम्भ कर 2005 में "वॉटर" में अपने करियर की अंतिम भूमिका निभाई थी।अपने करियर के लम्बे 60 वर्षों के दौरान उन्होंने करीब 160 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया है।

                मनोरमा का वास्तविक नाम एरिन इस्साक डेनियल था। उनका जन्म 16 अगस्त 1926 को लाहौर पंजाब में एक आयरिश माता और भारतीय ईसाई दंपत्ति के घर हुआ था।

               मनोरमा की यादगार फ़िल्मों में "दसलाख" [1966] , "झनक झनक पायल बाजे" [1955] , "मुझे जीने दो" [1963] , "मेहबूब की मेहंदी" [1971] , "कारवाँ" [1971] , "बॉम्बे टू गोवा" [1971] , "लावारिस" [1981] और फ़िल्म "सीता और गीता" [1972] उल्लेखनीय फ़िल्में थी। उनका निधन 15 फरवरी 2008 में मुंबई में हुआ।                                                                


                                                                 
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बीते दौर की खतरनाक खलनायिका ललिता पवार


      ललिता पवार : -

               ललिता पवार बॉलीवुड के हिन्दी सिनेमा की शानदार अभिनेत्री थी। बाद में वे एक चरित्र अभिनेत्री के रूप में हिन्दी सिनेमा में ख़ूब प्रसिद्ध हुई। ललिता पवार ने हिंदी, मराठी और गुजराती फ़िल्मों में अभिनय किया है।पवार ने अपने 70 वर्षों के लम्बे अभिनय सफ़र में 700 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त किया है। 

               उनकी नकारात्मक भूमिका की लोकप्रियता के लिए उनकी बाईं आँख का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हालांकि! इस बाईं आँख का किस्सा भी रोचक है।1942 में फ़िल्म "जंग-ए-आज़ादी" की शूटिंग के दौरान नए अभिनेता मास्टर भगवान को उन्हें जोरदार थप्पड़ मारना था। वहीँ, मास्टर भगवान ने उन्हें हक़ीक़त में बहुत ज़ोर से थप्पड़ जड़ दिया, जिसके कारण चेहरे का पक्षघात हो गया और ललिता पवार की बाई आँख की नस फट गयी।

          ललिता पवार का जन्म 18 जुलाई 1916 को लक्ष्मण राव शगुन के रूढ़िवादी परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अम्बा था। उन्होंने अपने अभिनय की शुरुवात 9 वर्ष की आयु में फ़िल्म "राजा हरिश्चंद्र" [1928] से की थी। सिनेमा के मूक युग और 1940 के दशक की फ़िल्मों में मुख्य भूमिकाएँ निभाई, यह सिलसिला उनके जीवन के अंत तक चलता रहा।

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अभिनेत्री नादिरा

        नादिरा  : -

                                 हिन्दी सिनेमा जगत में अभिनेत्री नादिरा की विशिष्ट सुंदरता के साथ प्रभावशाली स्क्रीन उपस्थिति की वज़ह से उन्हें अनेक हिन्दी फ़िल्मों में भूमिकाएँ मिली, खासकर 1950 से 60 के दशक में।नादिरा ने हिन्दी सिनेमा में नकारात्मक किरदारों को चित्रित करने में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। 

                     नादिरा ने सहायक अभिनेत्री की भूमिकाएँ निभाई लेकिन अपने यादगार अभिनय के जरिये दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी है।नादिरा का जन्म 5 दिसम्बर 1932 में बगदाद, ईराक में हुआ था। 

                     उन्होंने अपना करियर 1952 में महबूब खान की फ़िल्म "आन" से शुरू किया था। वे तब चर्चा में आई जब राजकपूर की फ़िल्म "श्री 420" के गीत 'मूड मूड के न देख' ने दर्शकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। नादिरा 2000 में फ़िल्म "जोश" में नज़र आयी थी, 9 फरवरी 2006 में बिमारी के कारण मुंबई में निधन हो गया।

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अभिनेत्री अरुणा ईरानी

अरुणा ईरानी : -  

                     बॉलीवुड हिंदी सिनेमा जगत की जानीमानी सहायक अभिनेत्री अरुणा ईरानी को कौन नहीं जनता ? जिन्होंने हिंदी, मराठी, गुजराती  और कन्नड़ फिल्मों में अभिनय किया है। 

                       अरुणा ईरानी अपने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है। अरुणा ईरानी का जन्म 18  अगस्त 1946 को मुंबई में हुआ। उनके पिता फरदून ईरानी तथा माता तेलुगु भाषी सगुणा थी। 

                      अरुणा ईरानी का फिल्मों में डेब्यू फिल्म " गंगा जमुना "[1961] से हुआ, जिसमे उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय की शुरुवात की थी। उन्हें फिल्म " पेट प्यार और पाप " [1985] और फिल्म " बेटा " [1992] में बेस्ट सहायक अभिनेत्री के लिए जाना जाता है।

नई फिल्मों में  नकारात्मक भूमिका निभानेवाली अभिनेत्रियाँ।     

                                                                           
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अमृता सिंह : -  

                     1983 में निर्देशक राहुल रवैल द्वारा निर्देशित फिल्म " बेताब " से हिंदी सिनेमा में डेब्यू करनेवाली अभिनेत्री अमृता सिंह का जन्म 9 फरवरी 1957 को हुआ था। 

                 उनकी लोकप्रिय फिल्मों में  " मर्द " [1985], फिल्म " साहेब " [1985], फिल्म " चमेली की शादी " [1986] और फिल्म " नाम " [1987] जैसी उल्लेखनीय फ़िल्में है।

                  अमृता सिंह ने निर्देशक राकेश कुमार की फिल्म " सूर्यवंशी " [1992] में नकारात्मक किरदार निभाया इसके आलावा निर्देशक मोहित सूरी की थ्रिलर फिल्म " कलयुग " में भी नकारात्मक किरदार में नजर आयी।

अन्नू अग्रवाल : -                                    

                        1993 में सावन कुमार प्रोडक्शन्स के बैनर तले बानी फिल्म " खलनायिका " में अपने नकारात्मक किरदार के कारण खलनायिकाओं के लिस्ट में अपना नाम दर्ज करनेवाली अभिनेत्री अन्नू अग्रवाल की बढ़िया भूमिका को कैसे भुलाया जा सकता है।                                                      

             इससे पहले 1990 में बनी म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म " आशिकी " को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। अन्नू अग्रवाल का जन्म 11 जनवरी 1969 को दिल्ली में हुआ था। वे सोशियोलॉजी की सुवर्ण पदक विजेता भी है।

प्रियंका चोपड़ा : - 

                  2000 में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की विजेता अभिनेत्री एवं फ़िल्म निर्माता प्रियंका चोपड़ा दो राष्ट्रिय फ़िल्म पुरस्कार तथा पांच फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिले है।

                उनका जन्म 18 जुलाई 1982 को जमशेदपुर झारखण्ड में हुआ है। 2004 में फ़िल्म "ऐतराज" में नकारात्मक किरदार निभाया था, जबकि उनका सपोर्टिंग रोल था। मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार और करीना कपूर थे।

बिपाशा बसु : -

                  बिपाशा बसु हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री है। मुख्यरूप से हिंदी फिल्मों अपने अभिनय के लिए जानी जाती है। इसके आलावा बिपाशा बसु को विशेष रूप से थ्रिलर और हॉरर फिल्मों के साथ कई आइटम नम्बरों के लिए भी जाना जाता है। 

                      लेडी खलनायिका वाली फिल्मों में 2003 में अमित सक्सेना निर्देशित और पूजा भट्ट द्वारा निर्मित फिल्म " जिस्म " में और फिल्म " राज " [2009] में बहुत ही खतरनाक लेडी खलनायिका का किरदार निभाया है।

                                                                           
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तब्बू : -

                तब्बू को बॉलीवुड हिंदी सिनेमा की सबसे कुशल अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। तब्बू ने अक्सर मुख्यधारा और स्वतंत्र सिनेमाओं में काल्पनिक से लेकर साहित्यिक तक परेशान महिलाओं की भूमिका निभाई है। 

              तब्बू का जन्म 4 नवम्बर 1971 को हैदराबाद में हुआ। उनका वास्तविक नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है। उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, सात फिल्मफेयर पुरस्कार, दो दक्षिण फिल्मफेयर पुरस्कार के आलावा भारत का चौथा नागरिक सम्मान " पद्मश्री " मिला है। 

             नकारात्मक  किरदार वाली निर्देशक श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित फिल्म " अंधाधुन " [2018] है, जिसमे आयुष्यमान खुराना नायक थे। उनके इस किरदार के लिए जी सिने द्वारा पुरस्कार प्राप्त हुआ।

 काजोल : - 

               काजोल हिन्दी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक है। अभिनेत्री काजोल कई प्रशंसाओं की प्राप्तकर्ता है, जैसे कि 6 फिल्मफेयर पुरस्कार, जिसमे पांच सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की रिकॉर्ड जीत शामिल है। काजोल को 2011 में भारत सरकार ने "पद्मश्री" से सन्मानित किया है।

             पूर्व अभिनेत्री तनूजा एवं शोमू मुख़र्जी की पुत्री काजोल का जन्म 5 अगस्त 1974 को मुंबई में हुआ। काजोल ने 1992 में बनी फ़िल्म "बेखुदी" से हिन्दी सिनेमा में डेब्यू किया है।

             नकारात्मक किरदार उन्होंने 1997 में निर्माता गुलशन राय एवं निर्देशक राजीव राय की फ़िल्म "गुप्त" में एक सनकी प्रेमिका की भूमिका निभाई थी।     

ऐश्वर्या राय बच्चन : - 

              हिन्दी सिनेमा के साथ तमिल सिनेमा की फ़िल्मों में अपने अभिनय के लिए जानी जाती है। 1994 में "मिस वर्ल्ड" प्रतियोगिता जीतनेवाली और हिन्दी सिनेमा में अपने अभिनय से विख्यात ऐश्वर्या राय ने अपने आपको सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हस्तियों में स्थापित किया है।

         ऐश्वर्या राय को उनके अभिनय के लिए भारत सरकार ने "पद्मश्री" से सम्मानित किया है, वहीं फ्रांस सरकार ने उन्हें 2000 और 2010 में "ओर्डर डेस आर्ट्स एट डेस लेट्रेस" से सम्मानित किया है।कृष्णराज एवं वृंदा की पुत्री ऐश्वर्या राय का जन्म 1 नवम्बर 1973 को मैंगलोर कर्नाटक में हुआ। 1997 उन्होंने मणिरत्नम की तमिल फ़िल्म "इरुवर" से फ़िल्मों में डेब्यू किया। 

        नकारात्मक किरदार 2004 में राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित फ़िल्म "खाकी" में निभाया है, जबकि अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, तुषार कपूर और अजय देवगन लीड रोल में थे।

कोंकणा  : -  

             एक अभिनेत्री एवं फ़िल्म निर्मात्री कोंकणा मुख्य रूप से हिन्दी और बंगाली फ़िल्मों में अभिनय करती है। उनका पूरा नाम कोंकणा सेन शर्मा है। उन्हें कई पुरस्कार मिले है, जिसमे दो राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार तथा तीन फ़िल्मफेयर पुरस्कार शामिल है।

          अभिनेत्री एवं निर्मात्री अपर्णा सेन की बेटी कोंकणा का जन्म 3 दिसम्बर 1979 को कोलकाता में हुआ। कोंकणा मुख्य रूप से मुख्यधारा की फ़िल्मों में अभिनय करने के आलावा स्वतंत्र फ़िल्मों में अपने अभिनय के लिए जानी जाती है।

         2013 में निर्देशक कानन अय्यर की सुपरनैचुरल थ्रिलर फ़िल्म "एक थी डायन" में कोंकणा ने नेगेटिव किरदार के रूप में एक डायन की भूमिका निभाई थी।