https://www.makeinmeezon.com/2024/02/pankajudhas.html
लोकप्रिय ग़ज़ल गायक पंकज उधास

           पंकज उधास ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों और ग़ज़ल गायन की कला पर अद्वितीय पकड़ के साथ अपने लिए एक अलग जगह बनायी है। कई दशकों के करियर में उन्होंने अपने भावनात्मक प्रदर्शन और मार्मिक गीतों के लिए व्यापक प्रशंसा अर्जित करते हुए, दुनिया भर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

          पंकज उधास केवल एक गायक ही नहीं थे, वह एक ऐसे कहानीकार है, जो भावनाओ और धुनों को सहजता से बुनते थे। अपने श्रोताओं के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी थी।

          इस परिचय में हम, पंकज उधास के जीवन और संगीत यात्रा में उतरते है, भारतीय संगीत की समृद्ध टेपेस्ट्री में उनके योगदान का सार तलाशते है।

जन्म एवं शिक्षा : -

                पंकज उधास का पूरा नाम पंकज उधास चारण है। लोग उन्हें केवल पंकज उधास के नाम से ही जानते है। उनका जन्म गुजरात स्थित राजकोट के निकट चारखडी-जैतपुर में केशुभाई उधास एवं जीतुबेन उधास के परिवार में 17 मई 1951 में हुआ था।

              पंकज उधास अपनी शिक्षा भावनगर के सर बीपीटीआई से प्राप्त की थी। उनका परिवार जब गुजरात से मुंबई आकर बसा तो पंकज उधास ने अपनी अधूरी पढ़ाई मुंबई स्थित सेंट जेवियर कॉलेज से की थी।

संगीत शिक्षा:-

              पंकज बचपन से अपने पिता को "दिलरुबा" वाद्य यंत्र बजाते हुए देखा करते थे। पंकज तथा उनके भाईयों की संगीत में रूचि को देखते हुए उनके पिता केशुभाई उधास ने राजकोट स्थित संगीत अकादमी में प्रवेश दिलवाया।

            पंकज उधास तो तबला सीखने चले थे, परन्तु उनकी दिलचस्पी गुलाम कादिर खान से हिंदुस्तानी मुखर शास्त्रीय संगीत सीखना आरम्भ किया था।

https://www.makeinmeezon.com/2024/02/pankajudhas.html
दिलरुबा वाद्य यंत्र

 करियर में मोड़ : -

                पंकज उधास की संगीत यात्रा 1970 के दशक में शुरू हुई थी। उन्हें सफलता 1980 में उनके पहले ग़ज़ल एल्बम "आहट" की रिलीज़ के साथ मिली। उनके बाद के एल्बम जैसे "मुकरार" [1981] "तरन्नुम" [1982] "महफिल" [1983] और "नायाब" [1985] महत्त्वपूर्णऔर व्यावसायिक रूप से सफल रहे, जिससे उन्हें ग़ज़ल परिदृश्य में सबसे आगे ले जाया गया।

              इसी बीच उन्होंने अपनी समृद्ध आवाज और त्रुटिहीन प्रस्तुति के साथ भावनाओं की एक विस्तृत शृंखला को व्यक्त करने की क्षमता के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान हासिल की थी।

https://www.makeinmeezon.com/2024/02/pankajudhas.html
ग़ज़ल गायक पंकज उधास विभिन्न मूड में
                                                            

                 पंकज उधास की विरासत ग़ज़लों में जान फूंकने और अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने की उनकी क्षमता में निहित थी। उन्होंने आज ग़ज़ल शैली को युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाया है, जिससे समकालीन समय में इसकी निरंतर प्रासंगिकता सुनिश्चित हुई है।

         उनके संगीत में प्यार, लालसा और उदासी की भावनाओं को जगाने की कालातीत क्षमता थी। ऐसी भावनाएँ जो संस्कृतियों और पीढ़ियों में गूंजती है।

पंकज उधास के लोकप्रिय गीत:-

1] चिट्ठी आयी है... 2] ना कजरे की धार... 3] और भला क्या मांगू मैं ... 4] मत कर इतना गुरुर... 5] चांदी जैसा रंग तेरा... 6] आज फिर तुमपे... 5] रिश्ता तेरा मेरा दिल जब से टूट गया... 6] आहिस्ता 7] दिल ने धड़कना बंद किया।

पुरस्कार : - 

1] 2001-मुंबई शहर के रोटरी क्लब द्वारा एक गज़ल गायक के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वोकेशनल रिकग्नीशन अवार्ड।

2] 2002-इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सम्मानित किया गया।

3] 2003-गज़ल और संगीत उद्योग में योगदान के लिए दादाभाई नौरोजी इंटरनेशनल सोसायटी द्वारा दादाभाई नौरोजी मिलेनियम एवार्ड से सम्मानित किया गया।

4] 2003-गज़ल को पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिए न्यूयॉर्क के बॉलीवुड म्यूज़िक एवार्ड में स्पेशल अचीवमेंट एवार्ड से सम्मानित किया गया।

5] 2003-'इन सर्च ऑफ मीर' नामक सफल एल्बम के लिए एमटीवी इम्मीज एवार्ड दिया गया।

6] 2004-लंदन के वेम्बली कॉन्फरेंस सेंटर में इस प्रतिष्ठित स्थान पर प्रदर्शन के 20 साल पूरे करने के लिए विशेष सम्मान।

7] 2006-"2005 के सर्वश्रेष्ठ गज़ल एल्बम" के रूप में "हसरत" को कोलकाता में प्रतिष्ठित "कलाकार" एवार्ड से सम्मानित किया गया।

8] 2006-पंकज उधास को ग़ज़ल गायकी के करियर में सिल्वर जुबली पूरा करने के उपलक्ष्य में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

निधन : -

                 लोकप्रिय जानेमाने ग़ज़ल गायक पंकज उधास लम्बे समय से अग्नाशय कैंसर से जूझ रहे थे। आखिर 26 फरवरी 2024 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया।